जैन मंदिर में 48 दिनी भक्तामर विधान का आयोजन

Contact us

January 7, 2020 (4)

भक्तामर स्तोत्र (हिन्दी में)

आदिपुरुष आदीश जिन, आदि सुविधि करतार। धरम-धुरंधर परमगुरु, नमों आदि अवतार॥ सुर-नत-मुकुट रतन-छवि करैं, अंतर पाप-तिमिर सब हरैं। जिनपद बंदों मन वच काय, भव-जल-पतित उधरन-सहाय॥1॥ श्रुत-पारग..

Continue Reading
Just fill out this quick form

Select Service
X
BOOK A SERVICE